उम्र का खेल

*उम्र का खेल*

कभी बड़े उम्र वालों से
हो जाता है प्यार
तो कभी
छोटे उम्र वालों से
अपने उम्र वाले
तो समय के साथ निकल गए
कैसा है
यह इंकार
अब तो इज़हार
कर नहीं पाते
इंकार से डरते हैं
उम्र का
हथियार लिए
वक्त काट रहा
अरमानों को
हम दिल की
नादानियों से
बचते हुए फिरते हैं
सुनो...
किसी से कहना नही
मैं प्यार से
झेल गया
बहुत सा
इंकार
सच तो यही है
बड़ा बेरहम है
यह उम्र का खेल...|

*असकरन दास जोगी*

Comments

Popular posts from this blog

भाग-2 : छद्म अम्बेडकरवाद क्या है ?

पंथी विश्व का सबसे तेज नृत्य( एक विराट दर्शन )

दिव्य दर्शन : गिरौदपुरी धाम(छत्तीसगढ़)