हम-दोनों-05

*#हम_दोनों-05*

कितनी दूरी है
कितना ऊँचाई है
सबसे जो विशाल है
यह अनंत आकाश है
अपने पंखों से
नापना चाहते हैं
हम-दोनों
सूर्य का तेज
बाधा बन सकती है
परंतु
हमारे हौसलों से
कहाँ लड़ सकती है
इस विशालता में
इस ओर से
उस छोर तक
जाना चाहते हैं
जहाँ कोई भी न हो
अगर हों तो सिर्फ
हम-दोनों
सुनने को
सबका सुनें
करने को
अपने दिल का करें
हर एक भेद खोलकर
पूरी निष्ठा से
एक-दूसरे पर
विश्वास करना
चाहते हैं
हम दोनों
इस अनंत में
ग्रह,नक्षत्र,धूमकेतु
अंधेला-उजाला
सब कुछ भूल कर
एक हो जाना
चाहते हैं
हम-दोनों....

*#रचनाकार_असकरन_दास_जोगी*

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