स्टेटस

" ए अनबोलनी सावन ल तो बढ़िया
वो असाढ़ रहिस
जेन मुँह फुटकार के कहिस
मैं नइ बरसँव....
तैं तरस तैं तरस "

" झन गुंगवावन दे
बने अस सुपचा
मैं लाख ले राख होजँव...
अइसन आगी धधका "

" पखरा के पिरीत म
मोर तन पातर होगे
कइसन हिरदे वोला देहे रे बिधाता ?
न घुरय न टूटय "

" मैं करेवँ मैं जानहँव
वोकर डाहर ले काहीं नइहे
काबर देही दया म मया....?
का जत के परे हे वोला गरज "

" धरती होगे
मन कब होही हरियर
अरे सावन...!
मोर मयारू ल पूछ के तो आ
कब बरसही...
वोकर मया के बादर...? "

*#असकरन_दास_जोगी*

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