प्यासा
प्यासा
पीने को क्या है ?
कुछ भी तो नहीं
न ज़हर
न शराब
न शबनम की बूँद
और न ही
स्वाति की घूंट
इन आँखों में
श्वेत कण हैं
तनहाई,जुदाई
ये सब मेरे हिस्से में है
और जो दिखता है
वह मरीचिका है
मैं प्यासा था
प्यासा हूँ
और प्यासा ही रहूँगा |
*#असकरन_दास_जोगी*
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