क्यों याद करें?

*#क्यों_याद_करें*

क्यों याद करें बताईए
ऐसा क्या किए हो
बस फाँसी पर तो लटके हो
कुछ बम फोड़े
कुछ गोलियाँ चलाए
कुछ गोरों को मारे
कुछ कालों को मारे
और जेल गए
इंक़लाब के नारे लगाकर
बस रंग दे बसंती चोला
गीत ही तो गाये हो

सुबह से शाम तक बस मशाल पकड़े रहते
आजादी के जुनून में कहीं भी बहते थे
विद्रोही बन क्रांति छेंड़े
हर कोई थोड़ी करता
अंग्रेज तो आतंकवादी कहते थे

माँ को रोते छोड़े
पिता को मौन
दुल्हन की मेंहदी लगी रही
इतना ही तो त्याग है
और करता कौन

आपको ही लड़ना था
क्योंकि गुलाम देश में जन्म लिए थे
और कोई क्यों भगाता भला अंग्रेजों को
सामंती शोषक तो मौज में थे

जागे थे तब जगाये थे
सोने वाले तो आज भी हैं
हम तो आजाद पैदा हुए हैं
अजाद ही मरेंगे
शहीद थोड़ी हो पायेंगे

क्रांति के प्रतिमान हो
पर चुनावी पार्टियाँ
अपने-अपने साँचे में ढ़ालकर दिखाती हैं
हम तो इनके चमचे हैं
कैसे देखें आपको स्वतंत्र नज़र से
बस दिवस मनाना ही याद करना रह गया है
और गुज़रते हैं रोज ही स्वार्थ के नगर से

हम स्वार्थी हैं लोभी हैं
देश सम्भाल नहीं पाते
अन्याय के खिलाफ लड़ नही सकते
संविधान के हिसाब से चल नही सकते
भ्रष्टाचार पर बोल नहीं सकते
क्रांति करना तो दूर
मशाल जलाना मुश्किल है
अपनो के बीच लड़ते झगड़ते
बस वाट्सेपिया,फेसबुकिया बन गए हैं
हम आपको याद करने के हकदार ही नहीं
बताओ भला क्यों याद करें...|

*#असकरन_दास_जोगी*

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