जलन

*#जलन*

मैं वर्षा जल हूँ
मुझमे भी जलन है
अपने प्रेम के लिए
तुम्हें प्रेम है
किसी और से
तो बताना चाहिए
मुझे इतना क़रीब लाकर
मेरे प्रेम को
पाबन्दी में बाँधना
क्या यह ठीक है ?
गुज़र रही थी
जानी-पहचानी गली से
कई दीवारों पर
तुम्हारे नाम के साथ
किसी और का नाम
अंकित देखा
यह कोई
मजाक तो नहीं होगा ?
शायद मैं
भ्रम में भी
हो सकती हूँ
शंका करना ठीक नहीं
बस गुज़ारिश इतनी है
इस समस्या का
समाधान ही कर दो
इस तरह मेरा
भ्रम में रहना
अच्छा तो नहीं ?
विश्वास है तुम पर
पर क्या करूँ
जलन की भावना
होती ही है
प्रेयसी और प्रेमी में
मुझमें भी रस का वश है
मानवीकरण से
मैं अछूता तो नहीं ?
जो बच जाऊँ
इस भावना से ?
कुछ तो बोलो समुद्र ?
आकाश को छोड़कर
आई हूँ
सिर्फ तुम्हारे लिए...!

*#रचनाकार_असकरन_दास_जोगी*

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