सुनो-सुनो दरबारी
*#सुनो_सुनो_दरबारी*
दरबारी कलमकार बनकर
पत्थरों का यशगान लिखना
कैसे भा जाता है आपको
सत्य पर परदे डालना
चम्पू काव्य के लहरों में बहकर
सत्ता के शह में
कंकड़ को पहाड़ बतलाते हो
हे महानुभाव
शायद आप ही
अतिश्योक्ति के जन्मदाता हो
सुनो साहब...
हाय तो जरूर लगेगी
शोषित जनता की
चाटुकारिता के श्याही में
अपने कलम को डूबाना
और शब्दों को लज्जित करना
कोई आप से सीखे
जागृति की मशाल को बुझाना
आपके वंशज तर गए
ऊँचे महलों के दरबारों में
और कबीरा खड़ा रहा
क्रांति लेकर चौबारों में
क्या कबीरा के शान में
कोई कमी है ?
शोषितों की आवाज़ बनो
विद्रोह लिखो विद्रोही बनो
सत्ता का यशगान नही
गैरत को ललकार कर
दरबार त्यागो
सुनो-सुनो दरबारी
क्रांतिकारी,जन-नायक
जन-कलमकार बनो |
*#असकरन_दास_जोगी*
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